ग़म से हर वक़्त की ज़द्दो-ज़हद करते हैं
उम्र का हर हाल लेकिन अहद करते है
उम्र जितनी भी मानिन्दे-नीम रहती हो
तसव्वुर में तेरे इसको शहद करते हैं
ग़ज़ल - इस लम्हे का हुस्न यही है
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आँखों में फ़रयाद नहीं है
यानी दिल बर्बाद नहीं है
मुझ को छोड़ गई है गुमसुम
ये तो तेरी याद नहीं है
तुम बिन मुरझाये से हम हैं
जैसे पानी खाद नहीं है
इस लम्हे...
9 years ago

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