Wednesday, July 1, 2009

an old one
मुमकिन है कुछ ख़बर में रौनक है
नामाबर* की नज़र में रौनक है

रहना चंद बुजुर्ग परिंदों का
बाकी सूखे शजर* में रौनक है

रात दीवाली दिल में अंधियारा
बाकी सारे शहर में रौनक है

रौशनदान के एक घोंसले से
'राही' मेरे घर में रौनक है
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नामाबर - messanger
शजर - tree

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