an old one
मुमकिन है कुछ ख़बर में रौनक है
नामाबर* की नज़र में रौनक है
रहना चंद बुजुर्ग परिंदों का
बाकी सूखे शजर* में रौनक है
रात दीवाली दिल में अंधियारा
बाकी सारे शहर में रौनक है
रौशनदान के एक घोंसले से
'राही' मेरे घर में रौनक है
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नामाबर - messanger
शजर - tree
ग़ज़ल - इस लम्हे का हुस्न यही है
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आँखों में फ़रयाद नहीं है
यानी दिल बर्बाद नहीं है
मुझ को छोड़ गई है गुमसुम
ये तो तेरी याद नहीं है
तुम बिन मुरझाये से हम हैं
जैसे पानी खाद नहीं है
इस लम्हे...
9 years ago

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