Sunday, June 14, 2009

Ghazal - wahi ek gila-e-taqdeer mera

June,2K7
वही एक गिला-ए-तक़दीर मेरा
पीटना यूँ पुरानी लकीर मेरा

क़ुफ़्र के हाथ का खिलौना हुआ हूँ
देता है लानत मुझे ज़मीर मेरा

कभी मजनू तो कभी फ़रहाद हो के
पेश करना हर दौर नज़ीर* मेरा

क़ातिल होने से बाज़ आ गया हूँ
चूकना न था वगर्ना* तीर मेरा

खैर ये महज़ मुक़द्दर की बात है
कि बादशाह हुआ है वज़ीर मेरा

बढ़ती गयी जितनी मुफ़लिसी* 'राही'
दिल और होता गया अमीर मेरा
*
नज़ीर - Example
वगर्ना - Otherwise
मुफ़लिसी - Poorness

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