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वही एक गिला-ए-तक़दीर मेरा
पीटना यूँ पुरानी लकीर मेरा
क़ुफ़्र के हाथ का खिलौना हुआ हूँ
देता है लानत मुझे ज़मीर मेरा
कभी मजनू तो कभी फ़रहाद हो के
पेश करना हर दौर नज़ीर* मेरा
क़ातिल होने से बाज़ आ गया हूँ
चूकना न था वगर्ना* तीर मेरा
खैर ये महज़ मुक़द्दर की बात है
कि बादशाह हुआ है वज़ीर मेरा
बढ़ती गयी जितनी मुफ़लिसी* 'राही'
दिल और होता गया अमीर मेरा
*
नज़ीर - Example
वगर्ना - Otherwise
मुफ़लिसी - Poorness
ग़ज़ल - इस लम्हे का हुस्न यही है
-
आँखों में फ़रयाद नहीं है
यानी दिल बर्बाद नहीं है
मुझ को छोड़ गई है गुमसुम
ये तो तेरी याद नहीं है
तुम बिन मुरझाये से हम हैं
जैसे पानी खाद नहीं है
इस लम्हे...
9 years ago

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