न रही उम्मीद-ए-क़रार ज़्यादा
किया है हद से इंतज़ार ज़्यादा
वक़्त की चाल सुस्त-दर-सुस्त है
जबकि तमन्ना की रफ़्तार ज़्यादा
या रब तेरे जहान में किसलिए
अमन कम है और तक़रार ज़्यादा
ज़माना बड़ा ख़राब है 'राही'
रहा कीजिये होशियार ज़्यादा
ग़ज़ल - इस लम्हे का हुस्न यही है
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आँखों में फ़रयाद नहीं है
यानी दिल बर्बाद नहीं है
मुझ को छोड़ गई है गुमसुम
ये तो तेरी याद नहीं है
तुम बिन मुरझाये से हम हैं
जैसे पानी खाद नहीं है
इस लम्हे...
9 years ago

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